1.
AUD-20180625-WA0003_Shloka 22-23 भावप्रकाशिकावृत्ति_भक्तिबाध्य एवं भक्तबद्ध
2.
AUD-20180622-WA0003_Shloka 22-23_कृष्ण द्वारा अर्जुन वृक्षों में परिणित नलक
3.
AUD-20180621-WA0013_Shloka 21_आत्माभूत (ब्रह्मा, शिव और लक्ष्मीजी) की अपेक्
4.
AUD-20180620-WA0001_Shloka 21_भगवान के परस्पर विरोधी गुण
5.
AUD-20180619-WA0003_भावप्रकाशिकावृत्ति श्लोक 19-21_भगवान् का भक्तवात्सल्य ग
6.
AUD-20180618-WA0001_Shloka 21_ दामोदर लीला में भगवान के भक्तवात्सल्य गुणों
7.
AUD-20180617-WA0001_Shloka 19-20_यशोदा माता पर श्रीकृष्ण ने जो अनुग्रह किया
8.
AUD-20180616-WA0000_Shloka 18-19_दामोदर लीला द्वारा कृष्ण की भक्तवशयता का प
9.
AUD-20180615-WA0003_Shloka 15-18_भगवान को बांधने के लिए दो आवश्यकता
10.
AUD-20180614-WA0006_11-14 भावप्रकाशिकावृत्ति
11.
AUD-20180613-WA0006_Shloka 13-14_ रस्सी द्वारा कृष्ण का बंधन
12.
AUD-20180612-WA0002_Shloka 11-14_श्रीकृष्ण का रस्सी द्वारा बंधन संभव नहीं ह
13.
AUD-20180609-WA0003_Shloka 10-11_कृष्ण द्वारा रोदन, नेत्रों को मलने के कारण
14.
AUD-20180608-WA0002_Shloka 9-10_यशोदा माता द्वारा कृष्ण के पीछे दौड़कर पकड़
15.
AUD-20180607-WA0004_Shloka 4-8_आनुकूल्य कृष्ण अनुशीलन--- श्लोक की व्याख्या
16.
AUD-20180606-WA0003_Shloka 3-7_यशोदा माता की अंग शोभा के विषय में मतभेद
17.
AUD-20180605-WA0001_Shloka 3_यशोदाऔर नन्द का अर्थ
18.
AUD-20180604-WA0004_Shloka 3_यशोदा माता के स्वरूप का वर्णन
19.
AUD-20180603-WA0002_Shloka 1-2_यशोदा माता द्वारा दधि मंथन करते हुए श्रीकृष्


