1.
AUD-20180407-WA0013_Shloka 116-118_सारग्राही और भारवाही
2.
AUD-20180406-WA0013_Shloka 116-117 अनुभाष्य_भाव भक्त के लक्षण
3.
AUD-20180405-WA0007_Shloka 116-117 अनुभाष्य_अजात रूचि साधक के लिए सिद्धांत
4.
AUD-20180404-WA0014_Shloka 116-117 अनुभाष्य_शास्त्र ज्ञान और हरिनाम दोनों क
5.
AUD-20180403-WA0007_Shloka 116-117_भक्ति राज्य में सिद्धांत जानने की आवश्यक
6.
AUD-20180402-WA0009_Shloka 111-117_महाप्रभु को किसी भी विष्णु नाम से बुलाने
7.
AUD-20180401-WA0005_Shloka 101-114_जीव शक्ति_श्रीकृष्ण ही स्वयं चैतन्य महाप
8.
AUD-20180331-WA0007_Shloka 101-103_जीव शक्ति
9.
AUD-20180330-WA0007_Shloka 101-103_जीव माया की दो शक्तियां-आवरणात्मिका शक्त
10.
AUD-20180329-WA0004_Shloka 101-103_बहिरंगा मायाशक्ति
11.
AUD-20180328-WA0012_Shloka 97-103_स्वयं अवतारी किशोर श्रीकृष्ण के 6 प्रकार
12.
AUD-20180327-WA0004_Shloka 96_परम तत्व की तीन शक्तियां
13.
AUD-20180326-WA0005_Shloka 93-95_आश्रय और आश्रित तत्व
14.
AUD-20180324-WA0012_ Shloka 87-92_अविमृष्ट-विधेयांशदोष, स्वयं भगवान किसे कह
15.
AUD-20180323-WA0006_Shloka 86_वेदों को अपौरुषेय कहा क्यों गया है
16.
AUD-20180322-WA0006_Shloka 67-86_श्रीमद् भागवतम् से श्रीकृष्ण के मूल अवतारी
17.
AUD-20180321-WA0006_Shloka 59-66_भागवत के वचनों की प्रमाणिकता
18.
AUD-20180320-WA0006_Shloka 55-59_ब्रह्माजी द्वारा बोला गया श्लोक परिभाषा रू
19.
AUD-20180319-WA0006_Shloka 53-55_तुरीय (चतुर्थ पुरुष)-सम्पूर्ण रूप से माया
20.
AUD-20180318-WA0004_43-52_ब्रह्माजी द्वारा तीन युक्तियों के द्वारा श्रीकृष्
21.
AUD-20180317-WA0005_Shloka 40-46_नारायण तत्व
22.
AUD-20180316-WA0003_Shloka 34-39_नारायण शब्द के अर्थ
23.
AUD-20180315-WA0005_ Shloka 28-34_ब्रह्माजी द्वारा बछड़ों को हरण करने के पश
24.
AUD-20180314-WA0009_Shloka 25-27_उपासना भेद से भगवान की महिमा जानी जाती है
25.
AUD-20180313-WA0005_Shloka 22-24_नारायण तत्व
26.
AUD-20180312-WA0020_ Shloka 22_श्रीमन चैतन्य महाप्रभु के स्वयं भगवान होने क
27.
AUD-20180311-WA0007_Shloka 21-22_तीन प्रकार के ताप_भगवत विचार
28.
AUD-20180310-WA0005_Shloka 19_ परमात्मा तत्त्व
29.
AUD-20180309-WA0019_Shloka 15-19_ब्रह्म_परमात्मा तत्व
30.
AUD-20180308-WA0035_Shloka 11-14_विजातीय भेद और स्वगत भेद
31.
AUD-20180307-WA0014_Shloka 11_सजातीय भेद
32.
AUD-20180306-WA0011_Shloka 11_अद्वैयज्ञान का तात्पर्य
33.
AUD-20180305-WA0006_Shloka 10_भगवान शब्द के अक्षर की व्याख्या
34.
AUD-20180304-WA0006_Shloka 6-10_श्रीकृष्ण स्वयं सिद्ध भगवान होते हुए भी नंद
35.
AUD-20180303-WA0013_Shloka5_ब्रह्म, परमात्मा और भगवान में से मानव का परम धर
36.
AUD-20180222-WA0005_Shloka 5_ब्रह्म, परमात्मा,भगवान
37.
AUD-20180221-WA0003_Shloka1-5_तीन विशेषण से युक्त गौर लीला रूप अमृतमयी गंगा


