1.
AUD-20180729-WA0003_Shloka भावप्रकाशिका वृत्ति, Chapter 11 Shlok 1-4_कुबेर
2.
AUD-20180726-WA0002_Shloka 42-43_संबंध ज्ञान होने पर ही आत्मनिवेदन संभव है
3.
AUD-20180725-WA0004_Shloka 42-43_कुबेर पुत्रों द्वारा केवल छः भक्ति अंगों क
4.
AUD-20180724-WA0007_Shloka 39-41_साधु के गुण- समदर्शी, मान-अपमान से परे भगव
5.
AUD-20180722-WA0003_Shloka 30-38 भावप्रकाशिकावृत्ति
6.
AUD-20180721-WA0010_Shloka 30-38 भावप्रकाशिकावृत्ति_ कर्तापन अभिमान
7.
AUD-20180720-WA0003_Shloka 30-38_भक्त आनुगत्य
8.
AUD-20180719-WA0004_Shloka 36-37_ कुबेर पुत्रों द्वारा भगवान से वर मांगना-
9.
AUD-20180718-WA0006_Shloka 34-35_भगवान् के अवतारों द्वारा प्रदर्शित अतुलनीय
10.
AUD-20180717-WA0002_Shloka 32-33_भगवान अदृश्य है_भगवान के स्वप्रकाश गुण
11.
AUD-20180715-WA0002_Shloka 32_भगवान सर्व स्वरूप है तो क्या किसी भी वस्तु के
12.
AUD-20180712-WA0004_Shloka 30-31_शुद्धाद्वैत विचार से वास्तव वस्तु
13.
AUD-20180711-WA0006_Shloka 29_जगत रूपी कार्य के निमित्त (मुख्य और गौण) और उ
14.
AUD-20180710-WA0002_Shloka 29_भगवान की अचिन्त्य अनंत शक्ति
15.
AUD-20180708-WA0001_Shloka 29_कुबेर पुत्रों द्वारा कृष्ण की स्तुति
16.
AUD-20180707-WA0001_Shloka 24-28_कृष्ण द्वारा ओखली घसीटते हुए यमलार्जुन वृक
17.
AUD-20180706-WA0001_Shloka 23_नारदजी द्वारा कुबेर पुत्रों के दोषों का वर्णन
18.
AUD-20180705-WA0001_Shloka 23_परचर्चा और परनिंदा नहीं करनी चाहिए
19.
AUD-20180703-WA0008_Shloka 20-23_नारद जी के श्राप के प्रभाव से नलकुबर और मण
20.
AUD-20180702-WA0008_Shloka 18-22_नारदजी द्वारा कुबेर पुत्रों का गर्व दूर कर
21.
AUD-20180701-WA0008_Shloka 15-17_तपस्या की भांति दरिद्रता व्यक्ति के गर्व क
22.
AUD-20180630-WA0008_Shloka 13-14_ऐश्वर्य गर्व रूप रोग का दमन करने के लिए दर
23.
AUD-20180629-WA0008_Shloka 10-12_तीन प्रकार के मद
24.
AUD-20180628-WA0008_Shloka 8-10_कुबेर पुत्रों का मद
25.
AUD-20180627-WA0002_ Shloka 1-7_यमलार्जुन का उद्धार


