जयशंकर प्रसाद जी की कविता 'भारत महिमा' जो उन्होंने अपने नाटक स्कंदगुप्त (1928) के लिए लिखी थी।
आवाज़ - अभिषेक अवतंस
हिमालय के आँगन में उसे, प्रथम किरणों का दे उपहार
उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक-हार
जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक
व्योम-तम पुँज हुआ तब नष्ट, अखिल...
- Release Date:September 9, 2023



